सुन लो मेरी करुण पुकार
सुन लो मेरी करुण पुकार
कान्हा !
आ जाओ इक बार
कान्हा !
मैं दुखियारी दर्द की मारी
आन पड़ी कान्हा शरण तिहारी
काहे मेरी सुधि बिसारी
दर्शन दो इक बार
कान्हा !
सुन लो मेरी करुण पुकार
दिनों के केवल तुम नाथ ही
अब सुधि लो इस अनाथ की
माना हूँ मैं अधम पातकी
तुम तो करुणाहार
कान्हा !
सुन लो मेरी करुण पुकार
कैसे सेवा करूँ मैं निर्धन
कोई तप ना कोई साधन
बस मैं तेरी प्रेम पुजारिन
तेरे ही आधार
कान्हा !
सुन लो मेरी करुण पुकार
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