क्यों जान लेते हो

क्यों लफ्ज़ आज खामोश हुए जाते हैं
क्यों तेरी याद में बहना छोड़ दिया
अब आओ अब आओ हमसफ़र मेरे
क्यों मेरे दिल ने कहना छोड़ दिया

क्यों नहीं उठती मेरे दिल से अब पुकार कोई
क्यों हवाओं का रुख सर्द हुआ जाता है
ना ख़ुशी है ना गमीं कोई अब
फिर भी दिल में क्यों दर्द हुआ जाता है

सुनती हूँ रोज़ तेरे आने की आहट क्यों
क्यों मेरे दिल को तसल्ली नहीं होती
लगता है आकर लौट गए हो तुम
वरना इतनी तन्हा इतनी अकेली नही होती

है इश्क़ तुझे तो फिर आजा आ भी जा
क्यों साहिब इतने इम्तेहान लेते हो
जान तो कबसे दे ही चुके हम तुमको
फिर भी तड़पा के यूँ ही जान लेते हो

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