जुदा नही होना
ये तो इंतहा है तेरे इश्क़ की सनम
की अभी भी मुझे चाहते हो तुम
ना ही काबिल ना ही औकात मेरी
की सम्भालूँ मैं अब सौगात तेरी
तेरी चाहतों से ही अब ज़िंदा हूँ
यूँ तो एक आज़ाद परिंदा हूँ
अब हूँ तेरी ही गिरफ्त में
तू अब मौत दे या शिकस्त दे
अब तुझमें ही फनाह होना है
मिल जाना है नहीं जुदा होना है
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