कन्हाई रे

कन्हाई रे !
तेरे ही सहारे मेरा जीवन
कन्हाई रे!
तुझको किया सब अर्पण

तेरे नाम से मेरी होती है सुबह
तेरे नाम से ही मेरी होती हैं रातें
तेरे संग जीना अब तेरे संग मरना
तेरे संग ही सब करनी हैं बातें
तेरे संग महके ये जीवन उपवन
कन्हाई रे !...........

रखना बना के अपनी ही दासी
जन्मों जन्मों से कितनी हूँ प्यासी
प्यास ये मिटे न मेरी श्यामसुन्दर
मुझे ऐसी अपनी लग्न लगा दो
नित ही बढे ये कहे मेरा अन्तर्मन
कन्हाई रे!..........

ना ही जानू सेवा पूजा ना मेरी साधना
ना ही जप तप न कोई अराधना
नहीं कोई भक्ति नही कोई शक्ति
चाहूँ केवल प्रेम नहीं कोई मुक्ति
प्रेममई हो जीवन सर्व समर्पण
कन्हाई रे !...........

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