मोहे वृन्दावन
मोहे वृन्दावन ही बुलाय लीजो
बड़ी देर भई तेरे आने में
श्यामा मैं बाट निहार रही
मोहे रख लीजो बरसाने में
कितने कितने दिन बीत गए
श्यामा अब दर पे बुला लीजो
होरी फागुन भी बीत चला
इक बार तो दरस दिखा दीजो
रूठे हैं मनमोहन कान्हा
ना देर लगेगी मनाने में
मोहे वृन्दावन......
मेरी बारी क्यों देर लगी
श्यामा भोरी मेरी कुसुम कली
मत चरणों से दूर मुझे कीजो
लाडली बड़ी वृषभान लली
मैं कौन सी विधि रिझाऊं तुम्हें
ख़ुशी मन की मिले रिझाने में
मोहे वृन्दावन......
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