बह जाना
कौन बांध सका फूलों की खुशबू
मौसम ए शबाब में बिखर जायेगी
कैसे बंधेगी ख़ूबसूरती कली की
वक़्त पे आकर निखर जायेगी
हवाओं का रुख कौन सम्भालेगा
आँधियों में फ़िज़ाएं थिरक जाएंगी
बरसातों को बोलो फुहारें छिपा लें
कभी ना कभी तो बरस जाएँगी
उड़ेंगें दूर आकाश में सब परिंदे
हवाओं के परों पर है आशियाना
फिर तेरा इश्क़ कैसे हदों में रहेगा
हमने भी सीखा तुझी से बह जाना
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