ऐसा तेरे इश्क़ का खुमार है
ऐसा तेरे इश्क़ का खुमार है
कि दिल कब से बेकरार है
कभी तेरी खोज हो जगह जगह
कभी हर जगह तेरा दीदार है
क्यों अब मुझको ये जूनून है
पल भर को भी नही सुकून है
कुछ खालीपन है ज़िन्दगी में
रूह भी तेरी ही तलबगार है
ऐसा तेरे........
क्यों लब पे तेरा ही नाम है
क्यों दिल हुआ तेरा गुलाम है
नहीँ रहना मुझे इक पल तेरे बिना
अब मुझ पर तेरा इख़्तियार है
ऐसा तेरे..........
तुम मुझको ना भुलाना कभी
ना दर से खाली लौटाना कभी
तेरे बिन कोई वज़ूद नहीं मेरा
तेरे बिन जीना ही बेकार है
ऐसा तेरे.........
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