रोशन सवेरा है

इन सर्द हवाओं ने मुझे और गमगीन कर दिया
जुर्म तो यूँ ही किया था और संगीन कर दिया

बरस रहीं इश्क़ की बारिशें और भीग रहे थे हम
हमदम को मनाना भी कुछ सीख रहे थे हम

तेरे इश्क़ में थे हुस्न के कायल हो रहे थे
देखा जो तिरछी नज़र से घायल हो रहे थे हम

फिर अचानक क्या हुआ की उठ कर चल दिए
मेरे सारे अरमान हाय आग में क्यों जल दिए

आओ अब जली सी रूह भी आवाज़ देती है
कहती है दास्ताँ अपनी अपने अलफ़ाज़ देती है

आना तो होगा साहिब हमे इंतज़ार तेरा है
गम वाली रात बीत चली आगे रोशन सवेरा है

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