ना तो मैंने इश्क़ किया

ना तो मैंने इश्क़ किया
ना ही बन्दगी करली
इश्क़ तो तुमने किया
मैंने तो दिल्लगी करली

गर होता इश्क़ मुझे
पल भी सुकून ना होता
तू ही तू रहता सिर्फ
और जूनून ना होता
जिन्दा हूँ ये भी एहसास नहीं
मैंने क्या खुदकुशी करली
ना तो मैंने.........

ना दिल में चाहत तेरी ही
क्यों तमन्नाओं का शोर है
दिल में तू नहीं है मेरे
दिल में रहता कोई और है
झूठ ही दिल में भरा है मेरे
जाने कब मैंने बन्दगी करली
ना तो मैंने.........

क्या तू चाहतों से ही मिलता है
या इबादतों से ही मिलता है
ना चाहतें ना इबादतें मेरी
क्या तू हसरतों से मिलता है
मुझको सिखाओ तुम इश्क़ करना
क्यों मैंने तुमसे बेरुखी कर ली
ना तो मैंने..........

Comments

Popular posts from this blog

भोरी सखी भाव रस

घुंघरू 2

वृन्दावन धाम की महिमा