तेरे लिए कुछ कहूं

तेरे इश्क़ में गिरफ्तार होने को तैयार हैं हम
हमको अपनी गिरफ्त में ही रखना हमेशा

इन आरज़ूओं का क्या करें जो बेसबब तुझे चाहती हैं
हम तो आरज़ूओं की आरज़ू करना भी भूल गए

तेरा इश्क़ अब सिर चढ़ कर बोलता है
यूँ तो कबसे खामोश ही बैठे हैं हम

तेरी पनाह में हो जाऊँ अब फनाह ही
डर लगता है ज़माना न छीन ले तुझको मुझसे

ये जो रौशनी सी झिलमिला रही है कहीं
मेरे यार ने नकाब हटाया होगा शायद

तेरे दीदार की तम्मना हा बस जी लेंगे
यूँ तो इश्क़ में कबसे तुझपे ही मर चुके हम

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