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श्रीललिते

युगल सुखकारिणी केलि सम्भारिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते रस विस्तारणी रङ्ग बिहारिणी  जय जय जय स्वामिनी ललिते वन आखेटिका नवल संयोजिका जय जय जय स्वामिनी ललिते अनंग विलासिनी विपिन वासिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते ललित प्रकाशिनी मुदित विलासिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते युगल प्रमोदिनी रस अनुमोदिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते कला मुद्रिके सुभग चन्द्रिके जय जय जय स्वामिनी ललिते नित्य षोडशी प्रमुदित अहर्निशी जय जय जय स्वामिनी ललिते नित्यरस मूलिनी परागित फूलनी जय जय जय स्वामिनी ललिते केलि आधारिणी नाद सम्भारिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते रस कल्लोलिनी मधुर बोलिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते नवल कौतुकी केलि चातकी जय जय जय स्वामिनी ललिते प्रीति संयोजिका केलि केन्द्रिका जय जय जय स्वामिनी ललिते अनंत शोभिणी अनंग लोभिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते केलि सम्पुटिका सैज सम्भारिका जय जय जय स्वामिनी ललिते ललित मनुहारिणी क्रीड़ा विस्तारिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते केलि पताका युगल विशाखा जय जय जय स्वामिनी ललिते अनंग पूर्णिमा मिलन मधुरिमा जय जय जय स्वामिनी ललिते ललित ज्योत्सना प्रीति सम्पन्ना जय जय जय स्वामिनी ललिते मदमत् सारँगिते...

ललित भीत

युगल सुखकारिणी केलि सम्भारिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते रस विस्तारणी रङ्ग बिहारिणी  जय जय जय स्वामिनी ललिते वन आखेटिका नवल संयोजिका जय जय जय स्वामिनी ललिते अनंग विलासिनी विपिन वासिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते ललित प्रकाशिनी मुदित विलासिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते युगल प्रमोदिनी रस अनुमोदिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते कला मुद्रिके सुभग चन्द्रिके जय जय जय स्वामिनी ललिते नित्य षोडशी प्रमुदित अहर्निशी जय जय जय स्वामिनी ललिते नित्यरस मूलिनी परागित फूलनी जय जय जय स्वामिनी ललिते केलि आधारिणी नाद सम्भारिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते रस कल्लोलिनी मधुर बोलिनी जय जय जय स्वामिनी ललिते नवल कौतुकी केलि चातकी जय जय जय स्वामिनी ललिते प्रीति संयोजिका केलि केन्द्रिका जय जय जय स्वामिनी ललिते अनंत शोभिणी अनंग लोभिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते केलि सम्पुटिका सैज सम्भारिका जय जय जय स्वामिनी ललिते ललित मनुहारिणी क्रीड़ा विस्तारिणी जय जय जय स्वामिनी ललिते केलि पताका युगल विशाखा जय जय जय स्वामिनी ललिते अनंग पूर्णिमा मिलन मधुरिमा जय जय जय स्वामिनी ललिते ललित ज्योत्सना प्रीति सम्पन्ना जय जय जय स्वामिनी ललिते

ललित विलास

जयजय ललित रसजोरि की ललित निहारन ....कैसी अद्भुत रसपगी रसमसी जोरि है री सखी ! दोऊ रसीले रसिया ....इनके अंग अंग में अनन्त अनंग विलास भरे री..... रसीले कौतुक .... रसीली चितवन ... रसीली निहारन .... दिवा रात्रि यह रसीली जोरि रस सिन्धु में ही अवगाहन करती रहती है..... दोऊ बिहारी हैं री यह .... बिहार में भरे .... इनका हृदय उस रस सागर की मीन की भाँति अतृप्त रहवै.... सदा सिन्धु में डूबे रहवै कौ व्याकुल....  निहार री ललित दासी .... ललित नेत्रंन की ललित कोर सौं निहार री ..... निहार निहार के सुख लेय री....और और ललिताई गह्वराई की आशीष देय री इस ललित बिहारिनि जोरि कौ.....यह परस्पर अंस भुज मिलाय मिलाय मिले रह्वैं री..... अपने हृदय रुपी ललित सेज पर इन्हें पौढ़ाए राखो री.... इनका यह विलास ही तो तुम्हारे प्राण हैं..... रसमई बिहारी जोरि कौ ललित बिहार री..... चिरजीवे अद्भुत यह जोरि..... इनकी आरती उतार लेय री.... और और मधुराई बढ़ती रहे.... ललित सुभग सेज ...ललित क्रीड़ा ....ललित श्रृंगार ..... यही गीत गाती रहो री ..... श्रीललिते श्रीललिते श्रीललिते ..... यही नाम तो इनके ललित विलासों का सम्पुट है री .... बिह...

अधरं मधुरं

अधरं मधुरं .....मधुर मधुर .... इतनी मधुरता भरी इन अधरों में ...बहा लिए जा रही यह वेणु ... रव रव मधुर मधुर ....  नयनं मधुरं.... क्या भरा है इन नयनों में .... कहाँ से ला रहे इतनी मधुरता ... अरे भीतर ही समेटे बैठे हो .... मत खोलो इन बड़े बड़े नेत्रों को .... मधुराधिपति ... मधुराधिपति .... वचनं मधुरं ... किसे गा रहे हो .... मधुरता को .... भीतर वही तो है ... मधुराधिपति ...  वचनं मधुरं .. भरे भरे ... झार रहे मधुरताओं को.... चलना भी मधुर मधुर.... यह लचकन ... यह ठुमकन ...  तुम्हारी रेणु भी अति मधुर है .... न होती मधुरता तो क्यों समस्त प्रेमी अपने मस्तक का श्रृंगार बनाते .... ओह .. जिसे स्पर्श करते मधुर मधुर ही करते न तुम ... नृत्यं मधुरं .... मधुरता में ही लासित होकर ऐसी ऐसी मधुर मुद्राएँ हे त्रिभंग लला.... मधुराधिपति .... मधुराधिपति..... यह मस्तक पर मधुर मधुर तिलक ... अहा ... यह पीताम्बरी की मधुर कसन ...   रमणम  मधुरं ....रमणम मधुरं ..... मधुरताओं में ही रमण करते हो ... दृष्टमं मधुरं .... जान गई मैं कहाँ निहार रहे हो .... किसे निहार रहे हो .... कालिन्दी का यह मधुर स...

यूँ तो सुकून

यूँ तो सुकून भी मुझे किराये के मकां सा है  जलता है कुछ भीतर भीतर आँखों में धुआं सा है ऊँगली पकड़ के साथ भी तुमने ही चलाया था  पीछे से चल रही अपनी परछाई सा बनाया था  क्यों मानते हो अब मेरा रस्ता अब जुदा सा है  यूँ तो सुकून...... यह जिंदगी कभी कभी जली ताप के भार सी  कभी बरसती आँख यह कभी रूह पर बौछार सी  बहता है कुछ कभी कभी भीतर दबा सा है  यूँ तो सुकून...... क्यों जगाते हो सोई कलम क्यों आज कुछ भरा हुआ  मुद्द्त से सूखता जख्म क्यों आज फिर हरा हुआ  यह दर्द तो पुराना था क्यों आज कुछ नयां सा है  यूँ तो सुकून...... हर नई आह पर चलो वाह वाह कर लेते हैं  दवात ए इश्क़ में चलो कुछ स्याही भर लेते हैं  इश्क़ का सैलाब कब आँखों में थमा सा है  यूँ तो सुकून भी मुझे किराये के मकां सा है  जलता है कुछ भीतर भीतर आँखों में धुआं सा है

बुरे हम

हरिहों बुरे हम पसु समाना। भोग विषय में धंसे बुरे हम जीवन निद्रा भोग अरु खाना। भजन हीन कूकर सम जीवन भजन बिना कैसे होय निदाना। बाँवरी जन्म जन्म सौँ खोटी सीखी केवल बात बनाना।।

चोरी हो जाने की

कौन हो तुम चोर चोर सिरमौर नवनीत चोर चित चोर चुरा लेते हो न चित मनहर.... कर लेते हो मन का हरण और चुराने के बाद शेष क्या रहता है जो चोरी हुआ वो तो चला जाता है न अपना रहता ही नहीं मन को चुराने वाले तो तुम हो न फिर  मैं क्यों शेष रही क्या तुम चुरा भी न पाए मेरा मन नहीं नहीं  तुम नहीं चुरा पाए फिर चितचोर कैसे....  मनहरण कैसे .... पुनः प्रयास करो न चुराया था तो पूरा ही चुरा लेते अब भीतर व्याकुलता क्यों है अपना ही शेष न रखने की चोरी ही हो जाने की तुम्हारी हो जाने की....