नैनन आन बसो

नैनन आन बसो नन्दलाल
नैनन आन बसो गोपाल
निर्धन दिन हीन मैं पातकी
तेरी शरण आधार
नैनन आन बसो......

मुझ निर्धन को भिक्षा दीजो
अपनी शरण में अब रख लीजो
दीनानाथ कृपा दृष्टि कीजो
तुम ही मेरो रखवार
नैनन आन बसो.......

मुझ निर्गुण में गुण नही कोई
सेवा की विधि जानू ना कोई
प्रेम दो बनो नहीँ निर्मोही
दासी खड़ी बांह पसार
नैनन आन बसो.......

प्रेम बने अब जीवन मेरा
बिन प्रेम जीवन घोर अँधेरा
कष्ट हरो प्रभु मन का मेरा
पकड़ो जीवन पतवार
नैनन आन बसो ......

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