श्याम से प्रीत

श्याम से प्रीत लगा रे मनवा कौन घड़ी हो जाना
श्याम नाम बिन जीवन झूठा क्यों पाछे पछताना

बीत रही तेरी उम्र बांवरे कोई नही आधार तेरा
जग की झूठी प्रीत लगाई श्याम ही सच्चा प्यार तेरा
फिर तू बांवरे हाथ मलेगा जब खाली होगा जाना
श्याम से प्रीत........

शाम बिना कोई ठौर न तेरी श्याम बिना कोई अपना
मिथ्या है सब माया जगत की झूठा है सब सपना
श्याम से सच्ची प्रीत लगाकर उसको फिर तू निभाना
श्याम से प्रीत.......

क्षण क्षण है अनमोल अब तेरा व्यर्थ करे क्यों जीवन
श्याम नाम की पूँजी जोड़ ले रह ना जाना निर्धन
श्याम ही तेरा प्राण अधारा श्याम में ही रम जाना
श्याम से प्रीत......

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