काहे सुध बिसरा दी
काहे सुध बिसरा दी मेरो बांके बिहारी
तेरी मोहनी सुरतिया पे जाऊँ वारी वारी
बनके मयूर नाचूँ बागन में तेरे कुंजन में
बनके कोयलिया गाउँ तेरे बागन में
आँखों में समाय गयी तेरी सूरत प्यारी प्यारी
काहे........
बंसी की मधुर तान सुना दो
अपने प्रेम की जोगन बना दो
भूले मुझे ये झूठी दुनियादारी
काहे........
कभी तो मिलो आके यमुना किनारे
आँखें मेरी तेरी राह निहारें
आके सुनो मेरी बातें सारी
काहे.......
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