रैन दिवस बरसत मोरे नैना
पिया बिना बरसत मोरे नैना
रैन दिवस अकुलावे बाँवरिया कितहुँ ना पावे चैना
दिवस बिताऊँ तेरी बाट निहारत काटे कटे ना रैना
हिय माँहि पीर बढे क्षण क्षण झर झर जावे नैना
अबहुँ सुधि लीजो अपनी बिरहन की देह माँहि प्राण रहै ना
पीर हिय की कैसो कहे बाँवरी मुख से कछु कहे ना
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