युगल की सखियाँ @1
हमारे युगलधन श्री प्रिया प्रियतम रसिक शिरोमणि श्री नित्य निकुंजेश्वर मोहन और नित्य निकुंजेश्वरी श्री मोहिनी सदैव प्रेम उन्मत हैँ और उनको नित्य नित्य लाड करती हुई उनकी प्रेम स्वरूप सखियाँ ,जो सदैव इनके सुख के वर्धन को लालायित रहती हैँ,उनकी इस भावना को नमन करते हुए कुछ शब्दों द्वारा जो रचना बन पड़े।
युगल की सखियाँ
सखियाँ सदैव उन्मादिनी रहती हैँ अपने प्रिया प्रियतम के सुख वर्धन को सदैव लालयित। सखी के प्राण हैं प्रिया लाल । प्राण ही नहीं केवल उसके प्राणधन ,जीवनधन ही उसके श्री युगल श्री राधा माधव सरकार हैँ। उसके जीवन की प्रत्येक चेष्ठा ही अपने युगल के सुख हेतु। यदि उसके जीवन से उसके युगल को आनन्द न हो तो प्राण धारण करना भी व्यर्थ ही प्रतीत होता है। युगल के लिए नित्य नए प्रेम साधन करना ही इनका जीवन है। इनकी सेवा विधि ही इनकी सुख निधि है। सदैव युगल सुख में सुखी एवम उनके आनन्द में आनंदित रहती हैँ। युगल के सुख साधन हेतु ये सखियाँ नित्य निकुंज में किसी भी रूप किसी भी भाव द्वारा रहती हैँ। श्री प्रिया लाल का सुख ही इनका जीवन। इनके जीवन का एक ही अनन्य आश्रय इनके श्री प्रिया लाल जु। युगल के प्रेम रस में वर्धन ही इनका सुख। तत्सुखमयी वृति ही इनका जीवन है।
विविध प्रकार की सेवाओं द्वारा ये सखियाँ अपने भाव पुष्प श्री युगल के चरणों में समर्पित करती रहती हैँ। अपने श्री युगल को आनन्दित करती रहती हैँ। अपने प्रिया लाल जू का श्रृंगार करके उनके दिव्य सौंदर्य का पान करने से भी सकुचा जाती हैँ। क्योंकि श्री प्रिया जी का सौंदर्य श्री लाल जू की निधि है। श्री लाल जू इस सौंदर्य सुधा को पीकर कभी तृप्त नहीं होते। अपने तृषित चकोरों से ये प्रति क्षण भी श्री प्रिया जू के अप्रितम सौंदर्य का उनकी माधुरी का पान करते रहते हैँ,और जितना ये उस सौंदर्य सागर में डूबते हैँ उतने ही और तृषित होते जाते हैँ। सखियाँ श्री प्रिया जू का नित्य नवल मनोहर श्रृंगार करती हैँ और अपनी श्री प्रिया के सौंदर्य को क्षण भर निहारने से भी संकोच करती हैँ। इसी प्रकार श्री लाल जू का श्रृंगार भी श्री श्यामा के सुख संवर्धन हेतु ही ।
क्रमशः
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