सखी री हिय लागी
सखी री हिय लागी बिरहा पीर
मुख ते नाय सब्द कोऊ आवै नैनन झर रह्यौ नीर
कहियौ कोऊ पिया सों जाये मिल जावो जमुना तीर
बिरहन कैसो धीर धरे री क्षण क्षण होय अधीर
कौन घड़ी पिया आन मिले मोहे पीर सुनो मनवीर
बिरह पीर सोई जाने सखी री जिस हिय लागे बिरहा तीर
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