प्रेम रोग
रोग होय प्रेम को अति भारी कोऊ वैद बुलावो री
नैनन बाण लग्यो हिय माँहि कोऊ उपाय करावो री
प्रीतम छब निहारत ही जीवूं कोऊ प्राण बचावो री
नन्दनन्दन बिन हिय करे क्रंदन कोऊ जाय सुनावो री
कोऊ पाती लै जावो मेरो प्रीतम हाथ धरावो री
बाँवरी सुधि बुधि खोय रही तेरी प्रीतम मोहे मिलावो री
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