विधना कैसो लिखेहो
विधना ! कैसो लिखेहो हो भाग
प्राणनाथ बिन क्षण क्षण अकुलाऊँ हाय सखी अभाग
प्राण धरे ना देह माँहि सखी पुनः पुनः जावे त्याग
प्रीतम बिन क्षण क्षण की वेदना हिय तलफत ज्यूँ आग
प्रेम विहीना होऊँ सखी मैं नाँहि हिय अनुराग
कबहुँ प्राणनाथ मोहे हिय लगावे कबहुँ जगे मेरो भाग
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