कौन विधि हिय बचावुं
कौन विधि हिय बचावुं सखी अपनों नन्दनन्दन बरछी मारी
सगरी सुधि बुधि भूल गयी सखी बौराय गयी मैं ब्रजनारी
नन्दनन्दन मोहे लागे अति प्यारो वाकी छब पर सखी बलिहारी
अबहुँ बौराय सी डोलूँ सखी याने ऐसो मति मारी
काज सभी छूटे सखी मेरो हिय धस गयो मदन मुरारी
कोऊ दवा होय तो दीजौ लग्यो मोहे प्रेम व्यसन भारी
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