आज फिर हरे हो गए
आज फिर हरे हो गए कुछ दर्द पुराने
हमको रोते हुए बीत गए कितने जमाने
तुम कर देते कोई वादा चाहे झूठा ही सही
हमको उम्मीद तो रहती तुम कभी आओगे निभाने
आज फिर ......
चलो कुछ दर्द ही दे दो जिंदगी कट जाए मेरी
आज निकली हूँ घर से कोई दर्द कमाने
आज फिर ......
सुना है घूमते हैँ कई आशिक तेरी गलियों में हमेशा
तू भी तयार खड़ा है साहिब यूँ इश्क़ लुटाने
आज फिर ......
तू नहीं तो तेरी तस्वीर से ही दिल बहलाते हैं
रोज़ सोते हैं तेरी तस्वीर लिए अपने सिरहाने
आज फिर ........
नींद भी लूट ली मेरा चैन हम खो बैठे
जाग जाग रातों को रोते रहते हैँ तेरे दीवाने
आज फिर हरे हो गए कुछ दर्द पुराने
हमको रोते हुए बीत गए कितने जमाने
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