प्रीत लगा मोहन संग

प्रीत लगा मोहन संग हाय सखी मैं हारी
तज गए मोरे प्राणनाथ मोहे मैं बिरहन दुखियारी
प्रेम ही मेरो हिय सखी ना होवै व्यथा अति भारी
जो हिय माँहि प्रीत होवै निर्मल काहे तजे बनवारी
मग जोवत तेरो रहे बाँवरी रैना बीत गयी सारी
मुझ निबल का बल कोऊ नाँहि नाथ मेरे गिरधारी

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