मैं प्यारी अपने प्रीतम की

मैं प्यारी अपने प्रीतम की प्रीतम मेरो नन्दकिशोर
प्रेम रस बरसावे अति प्यारो साँझ होय चाहे भोर
प्रेम सुधा पीवत रहूँ सखी प्रीतम प्रेम छलकावे
नैनन प्रेम मदिरा सो भीजै पीवत ही रह जावे
अंग अंग प्रेम रस बरस्यो व्यसन प्रेम को लगावे
जाको नन्दनन्दन सखी लूटे कौन विधि बच पावे

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