कैसे नज़र हटायें

कैसे नज़र हटाएं कुर्बान हो रहे हैं
तेरे इश्क़ में बेखुद से नादान हो रहे हैं
क्यों होश नहीं रहता तुझे देखने के बाद
क्यों बेताब इतने मेरे अरमान हो रहे हैं

हाय कत्ल कर रही है
इक इक अदा कुछ ऐसे
तुझे देखते ही सनम मन
खुद से अनजान हो रहे हैँ

हो रहा है एहसास भी अब इश्क़ का
तुम हमको सिखा रहे हो कैसा अजब तरीका
क्यों बढ़ रही है इतनी आशिकी अब
आज साहिब मुझपर मेहरबान हो रहे हैँ

यूँ ही नज़र ए करम रखना
यूँ ही मोहबत करते रहना
हम हम ना रहें अब बाक़ी
तेरा सामान हो रहे हैं

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