मन रे

मन रे !
तू मानव जन्म गवाया
तू गोविन्द ना पाया
मन रे.......

नहीं किया तूने कोउ साधन
जप तप ना कोउ नाम आराधन
रूप नाम लीला को न ध्याया
तू गोविन्द ना पाया
मन रे........

नैन बसे ना मोहनीं मुरतिया
करण बजे ना मधुर मुरलिया
नर तन व्यर्थ गवाया
तू गोविन्द ना पाया
मन रे.........

मनमोहन नटवर गिरधारी
हाथ मुरली संग राधा प्यारी
यमुना पुलिन ना नैन समाया
तू गोविन्द ना पाया
मन रे.........

सदा रहा विषयों में पलता
मन तेरा विरह में क्यों न जलता
मन राधा चरण ना लगाया
तू गोविन्द ना पाया
मन रे......
तू मानव जन्म गवाया
तू गोविन्द ना पाया
मन रे.........

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