काहे सखी री

काहे सखी री प्रीत लगाई
प्रीत लगाई सो चैन ना पाई
काहे सखी री.......

प्रीत किये दुःख होवे भारी
सखी मेरो मति गयी मारी
जो मैं पिया को जिया दे आई
काहे सखी री.........

रैन दिवस सखी चैन ना पाई
भूख गयी और नींद भी गवाई
काहे पिया मेरी मेरी सुधि बिसराई
काहे सखी री........

नहीं जानती प्रीत रीत ये होवे
पावे पिया जब सब कुछ खोवे
फिर सखी फिरती ना नैन लगाई
काहे सखी री.........

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