अनजान रहने दो

हूँ मैं अनजान तो अनजान मुझको रहने दो
भीतर मेरे मौत का थोडा सामान रहने दो

लाख खुशियाँ मिल जाएँ जिनमें गर तू ना हो
तेरी यादों से गम ए दिल मेरा वीरान रहने दो

हाँ तुझसे इश्क़ मुझे आज नहीं मुद्दत से है
और ये इश्क़ कबूल हो तुझे ये अरमान रहने दो

जाने कब से होंठों हमने सिल रखा है
आज मेरे दिल की हसरतें मुझे सब कहने दो

तेरी मोहबत के तूफ़ान उठते हैं यहां अक्सर
आज मत रोको मुझे साथ इनके बहने दो

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