सवाल आते हैँ
रह रह कर दिल में क्यों सवाल आते हैँ
कैसे भूल जाएँ बस तेरे ख्याल आते हैं
क्यों ये इश्क़ वजह बनता है दर्द की ही
क्यों हम सुलगती आग में खुद की जलाते हैं
क्यों होश रहता नहीं बेखुद से हम हैं
कभी हम होते ही नहीं और कभी लौट आते हैं
इक पल भी दूर होना तेरा क्यों गवारा नहीं
क्यों तेरे दूर होने के एहसास से मर जाते हैं
क्यों मेरा दर्द तुमको हसीन लगता है
चलो तुमको जो पसन्द हो तो और बढ़ाते हैं
इतना दर्द हो जाए की हम जल जाएँ तपिश में
क्यों आग आँखों से निकले अश्क़ फिर बुझाते हैं
सुन गम ए इश्क़ बर्बाद कर दे मुझे तू
तुझसे फासले हों जो इतने हम जीना कहाँ चाहते हैं
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