लफ़्ज़ों में कहाँ उतरोगे
तुम कहाँ उतरोगे साहिब लफ़्ज़ों में
क्या कोई कलम कह सकती तुम्हें
तुम तो एहसास हो एक रूह के लिए
अब मेरी रूह महसूस कर सकती तुम्हें
मत पूछ हाल मेरे दिल का सखी
अब धड़कनें उनका छेड़ साज़ रहीं
रूह तक उनको अब उनको महसूस करे
कुछ ऐसे महसूस कर उनके अंदाज़ रहीं
तेरे आने से सिहर जाते हैं कुछ यूँ हम
की अलफ़ाज़ मेरे खो ही जाते हैं
तुम इस तरह घुल से जाते हो मुझमें
फिर तू और मैं एक हो ही जाते हैं
नहीं दिल में कोई और अब सिवा तेरे
नहीं रह पाएंगे साहिब हम बिना तेरे
मत लो इम्तिहान मेरे सब्र का तुम
नहीं है और अब जीना मुझे बिना तेरे
हाँ खूबसूरत रिश्ता है मेरा तेरा
साथ भी है पुराना मेरा तेरा
नहीं रह पाऊँगी बिना तेरे मैं
नहीं छूटेगा कभी साथ मेरा तेरा
यूँ ही रहना हर पल साथ मेरे
यूँ ही समझ लेना हर जज़्बात मेरे
छोड़ना नहीं साथ मेरा उम्र भर तुम
चाहे कैसे भी हाल रखे कायनात मेरे
बन गए हो धड़कन मेरे दिल की
अब क्यों कहूँ दूर हो मुझसे तुम
मुझमें ही रहते हो और मुझसे सी पर्दा तेरा
जाने कितनी चिल्मनों में छुप रहे हो तुम
आज लगता है मेहरबाँ महबूब मेरा
जो मुझको इश्क़ का एहसास हो रहा
दूर नहीं है यहीं है मेरे दिल में ही
क्यों उसकी धड़कनों का एहसास हो रहा
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