साथ हो
जब साथ हो
तो साथ हो
जब नहीं हो
तो भी साथ हो
जब साथ हो
पर साथ नहीं
ऐसे एहसास क्यों हैं मुझको
कभी पाते हैं
हर शै में तुम्हें
कभी ढून्ढ रहे
क्यों इधर उधर
कभी महसूस हो
तुम भीतर ही
कभी तेरी क्यों
मिलती ना खबर
ये इश्क़ है
या खेल रहे
तुम मिलने छिपने
का खेल मुझसे
मैं ढूंढती हूँ
जब साथ ही हो
ऐसे क्यों खेल रहे मुझसे
क्यों बेखुद सा कर रखा है
चलो अच्छा है
जो तेरी मर्ज़ी
पल पल साथ मेरे रहना
ये सुन लेना
मेरी अर्ज़ी
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