पिया मिल्न की दीजो री खबरिया

कोई पिया मिलन की दीजो रे खबरिया
काहे बिसराए दिए जा बैठे दूर नगरिया
कोई पिया मिलन.........

पलक ना लागी रात दिन मोरी
नैनों से निंदिया कर गए चोरी
बाँवरी बहाए नैन देख अब तोरी
पिया बिन सूनी लागे देखो री अटरिया
कोई पिया मिलन ........

पिया पिया रटते भई मैं बाँवरी
याद आवे वही यमुना की छाँव री
अधरों पे मेरे बस पिया तेरा नाम ही
एक बार बाँवरी को सुना दो बाँसुरिया
कोई पिया मिलन.........

दूर देस गयो पिया बिसार गयो मोहे
नहीं सुधि लीन्हीं पिया लाज ना आवे तोहे
बाँवरी निशदिन बाट तेरो ही जोहे
ओ निर्मोही पिया मेरी बीती रे उमरिया
कोई पिया मिलन.........

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