जो चाहे अंजाम

तुझे देखा नही महसूस किया है
आ किसी दिन एहसास को पक्का कर दे

रूह तो कब से नाम हुई है तेरे
ये जिंदगी भी आ अपने नाम कर दे

सुकून अब ना होगा तुमसे मिले बिना
या मिल मुझे या जिंदगी गुमनाम कर दे

बदनाम हों तेरे इश्क़ में तो भी खुश हैँ
आ इक बार फिर से बदनाम कर दे

बेखबर हैं दुनिया से हम होश में नहीं
चाहे तू दीवानगी के चर्चे सरेआम कर दे

हम तो है उल्फ़त के नशे में मस्त पड़े
अब होश कहां जो चाहे अंजाम कर दे

Comments

Popular posts from this blog

भोरी सखी भाव रस

घुंघरू 2

श्यामसुंदर का वेणु वादन