बसो नैनन में

हर पल बसो मेरे नैनन में
नित नित छवि तुम्हारी हो

क्यों खोजे मन इधर उधर
जब नैनन में छवि प्यारी हो

रसना नाम रटे निरन्तर
ऐसी स्थिति हमारी हो

ऐसी छवि पर बलि बलि जाऊँ
ये प्राणों से प्यारी हो

और जगत की सुध सब जाये
नैनों में कुञ्ज बिहारी हो

ये अभिलाष पूजाओ मेरी
तुम तो परोपकारी हो

निर्धन को अब हाथ दे राखो
शरण पड़ूँ तुम्हारी हो

जन्मों से बिछड़ी हूँ तुमसे
अब कुछ सुधि गिरधारी हो

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