तू दिल के आस पास है

क्यों तेरा इश्क़ सब भूला देता है

क्यों तेरी तड़प में जला देता है

क्यों अश्क़ बहते हैं आँखों से मेरी

क्यों कहते हैँ ये बस कहानी तेरी

क्यों तुम भूलते नही पल भर भी

क्यों लगे तेरे बिना ना पाऊँ जी

क्यों मुझे तेरा जूनून हो चला

क्यों तेरा नाम ही सुकून हो चला

क्यों भरती नहीँ है मेरी नज़र

क्यों हो गयी दुनिया से बेखबर

क्या ये तेरे इश्क़ की निशानी है

बोलते हैं तू बाँवरी तू दीवानी है

ये दीवानगी भी तूने ही तो दी है

मेरा कहां बस था नज़र तूने की है

अब यूँ ही नज़र मिलाते रहना

इश्क़ किया है तो निभाते रहना

तेरे दीदार तेरे इश्क़ की ही प्यास है

आँखों से तू दूर सही दिल के आस पास है

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