नज़र में क्यों नही आते
कहां रहते हो बोलो तो
दिलों में घर तुम्हारा है
नज़र से दूर फिर क्यों हो
नज़र ने क्या बिगाड़ा है
तुम्हें जब याद करते है
लगे की दूर रहते हो
फिर क्यों एहसास होता है
ये दिल घर ही तुम्हारा है
नज़र से दूर फिर क्यों हो
नज़र ने......
बड़ी शिद्दत से चाहते हैं
तुम्हें भी इश्क़ है मुझसे
पर तेरा इश्क़ सच्चा है
मेरा तो झूठा सारा है
नज़र से दूर रहते हो
नज़र ने .......
मेरी ऑंखें बरसती हैं
तेरा दीदार पाने को
रूह भी कब की प्यासी है
लबों पे नाम तुम्हारा है
नज़र से दूर रहते हो
नज़र ने......
यकीन है आओगे एक दिन
मुझे दीदार भी होगा
जन्म से रूह प्यासी है
अब इंतज़ार तुम्हारा है
नज़र में क्यों नही आते
नज़र ने.....
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