अब बिगड़ी मेरी बना दो
तेरे बिन कैसी जिंदगी
तुम ही मुझे बता दो
यूँ दूर ना मुझको रखो
ऐसी नहीँ सज़ा दो
मुझसे क्यों दूर हो तुम
रूह मेरी जल रही है
अब तो गले लगा लो
ये परदे ही गिरा दो
मुझे बस तेरी कशिश है
तेरा जूनून हो चला है
अब तुम देखो क्या है करना
रख लो चाहे मिटा दो
तुझे चाहना काम अब मेरा
क्या ये भी मेरी खता है
लगता है अगर जुर्म ये
तो इश्क़ की सज़ा दो
क्यों तुमको खबर नहीं है
बेताब रूह को सबर नहीं है
चीखें हैं भीतर उठ रही
ना आग को हवा दो
बादल बन बरस जाओ
इस रूह की तड़प कम हो
है इंतज़ार अब नामुमकिन
अब बिगड़ी मेरी बना दो
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