कभी दूर नही करना
मुझे कभी अपने कदमों से दूर नहीँ करना
मर जाऊं चाहे मैं मगरूर नहीँ करना
नहीँ रह पाऊँगी मैं अब तुम से अलग होकर
ठोकर मारो जितनी मज़बूर नहीँ करना
लाखों जन्मों से तुमसे हुई दूरी
अब मिल जाओ मुझको फिर दूर नहीँ करना
कदमो में ही रख लो चाकरी हमेशा ही
मुझे मिटना कबूल हो मशहूर नही करना
अगर इश्क़ हुआ तुम्हें तो बात मेरी मानो
अपने से अलग प्यारे दस्तूर नही करना
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