इक तेरी दीवानगी सी

एक दीवानगी सी तेरी ,मेरी आँखों में
एक एहसास है तेरा,रूह को मेरी

घुल रही हूँ तुममें या तुम समा रहे मुझमें
ये एहसास बस हम ही जानते है

ये दौर मोहबतों के क्या समझे दुनिया वाले
आशिक ही बस आशिकों को पहचानते हैँ

अब ना रखो पर्दा की जान चली जायेगी मेरी
अब हम कहां दुनिया की रस्मे मानते हैँ

एक एक पल जीना अब हो रहा मुश्किल
तेरा मिलना ही जीने की वजह मानते हैँ

यूँ तो हर और दिखाई देते हो तुम
अजनबी नही हो अब हम तुम्हें पहचानते हैँ

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