मोहना जगत लगे मोहे खारी
मोहना !
जगत लगे मोहे खारी
घिरी पड़ी हूँ भवबन्धन सों
हाथ पकर दयो निकारी
मोहना !
जगत लगे मोहे खारी
तुम ही सब कुछ जानो नाथ जी
तुमसे क्या मैं छिपाऊँ
तुमसे कहूँ ना मन की व्यथा तो
कौन द्वारे मैं जाऊँ
बसो मेरे मन में नन्दलाल अबहुँ
आओ खोल प्रेम किवारी
मोहना !
जगत लगे मोहे खारी
विषय नाग मोहे अबहुँ काटयो
पीर बड़ी मेरे मन में
नाम तेरा ही मेरा होय अधारा
आन रहो जीवन में
तुम ही मेरे प्राण नाथ हो
काहे दीन्हीं बिसारी
मोहना !
जगत लगे मोहे खारी
जन्मों की दूरी है भगवन
अब मेरो बन्धन खोलो
सुधि लो मेरी मौन रहो ना
प्रियतम मुख से बोलो
अब तो नाथ मोहे अपनी कीजो
दासी हूँ मैं तुम्हारी
मोहना !
जगत लगे मोहे खारी
घिरी पड़ी हूँ भवबन्धन सों
हाथ पकर दयो निकारी
मोहना !
जगत लगे मोहे खारी
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