सखी री पिया भयो बैरी

सखी पिया भयो री मेरो बैरी
कौन घड़ी वासे नेह लगायो री
सखी री मैं ही बाँवरिया ठहरी
हाय पिया भयो........

मोहे ना दिखावे अपनी सुरतिया
बन गयी मैं पत्थर की मुरतिया
जलत जिया मोरा अगन तपावे
रोऊँ आँख में भर स्वप्न सुनहरी
हाय पिया भयो.......

पिय प्रेम में सुधि बुधि खोई
सखी पिया ने ली ना खबर कोई
हाय सखी क्यों मैं बाँवरी होई
छम छम बरसे नैनो की बदरी
हाय पिया भयो.........

पिय मेरी विनय मान लीजो
इस दासी को अपनी कीजो
श्याम पिया मोरे किस विधि रीझो
मैं अवगुण भरी मतिहीना ठहरी
हाय पिया भयो.........

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