सखी री गोपाल सों

सखी री गोपाल सों उलझ गये ऐसो नैन
जगत की सब सुधि मोहे बिसर गयी तबसों
उलझ गये मेरो नैन
कौन सो कहूँ जाय सखी हिय के मेरो बैन
सखी री .....

किस छलिया से नेह लगाय बैठी री सखी
उलझ गये मेरो नैन
एक छवि को हिय तरसे अकुलाउँ दिन रैन
सखी री ......

कौन घड़ी तोसे नैन मिलाय बैठी बाँवरी
उलझ गये मेरो नयन
प्रेम मार्ग जबते चली री हृदय को नहीं चैन
सखी री गोपाल सों उलझ गये मेरो नैन

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