पिया तेरी बिरहन
पिय तेरी बिरहन नैन बहाय
कोऊ संदेस ना लायो कागा कैसो हिय समझाय
पिय आन अबहुँ सुधि लीजौ मोहे दियो भुलाय
पुनः पुनः द्वारे दौड़ी जावै बाँवरी रहे अकुलाय
आहट होय तो समझे हाय अबहुँ मेरो पिय आय
पिय पिय रटत रही बाँवरी और सब दियो भुलाय
अबहुँ विलम्ब नाँहि कीजौ पिय प्राण रहे छटपटाय
बाँवरी हिय तबहुँ सुख होवै पिय दरस जब पाय
मिल्न आस माँहि प्राण न जावै पिय पिय रटती जाय
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