तुध बिन क्या जीवना
तुध बिन क्या जीवणा मेरे ठाकुर तुध बिसरूँ प्राण न आवै
मोहना तोसे नेह लगायौ ऐसो जिय मोहन मोहन गावै
रैन दिवस का भेद रही भूली मैं उर अंतर पीर न जावै
बाँवरी होय नाम रटू तेरा मोय और कछु ना भावै
आवो प्रियतम अबहुँ आन मिलो मेरो जीवन ऐसो जावै
बाँवरी की उर पीर मिटे तबहुँ मोहन आन दरस दिखावै
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