सांवरिया तोसे नयन मिलाय गयी हार

साँवरिया !
तोसे नयन मिलाय गयी हार
बाँवरी बिरहन दृग झरावे पुनः पुनः करे पुकार
साँवरिया !

कारे कारे मेघ छाये गगन में
पीर उठे पिया जी मेरे मन में
बिरहन की सुधि लेवन वारे तुमसों करूँ मनुहार
साँवरिया !

भोर भई या साँझ होय जावै
बिरहन तेरी ही आस लगावै
देह प्राण की कोऊ सुधि नाँहि भावै नाँहि सिंगार
साँवरिया !

हृदय वीणा पर राग बिरह के बाजै
कछु न सुहावै मोये कछु नाँहि साजै
पिया पिया टेरत भई बाँवरी आस लगाई तिहार
साँवरिया !
तोसे नयन मिलाय गयी हार
बाँवरी बिरहन दृग झरावे पुनः पुनः करे पुकार
साँवरिया !

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