क्या चैन होगा

क्या चैन होगा रूह को कभी
या तड़प ही अब मेरा नसीब है
तेरा दीदार ना हुआ अगर सांवरे
मुझसा और कौन बदनसीब है

क्यों तूफ़ान सा है दिल में
क्यों धड़कन बेताब सी है
क्यों दिल में बेचैनी है इतनी
क्यों तड़प ये बेहिसाब सी है

कत्ल ही कर दो तो अच्छा है
क्यों रोज़ तुझे दुहाई देते हैँ
तेरी जुदाई में अब प्यारे
सब तुझसे सी दिखाई देते हैं

मत आओ साहिब यूँ ही रह लेंगे
और दर्द दो वो भी सह लेंगे
रोकें कैसे पर इन अश्कों को
ये बगावत करते हैं देखो बह लेंगे

दर्द में जीने की आदत है हमें
जहर पीने की आदत है हमें
मत आओ इंतज़ार ही करेंगे हम
यूँ ही मरने की आदत है हमें

कोई कहे जो बेदर्द तुम्हें
तो भी मेरे दिल को दर्द होता है क्यों
कोई कहे जुल्म करते हो तुम
तो भी मेरा दिल रोता है क्यों

बहुत सोचा की इस दिल पर काबू रखूं
पर ये तुम को इतना चाहता है क्यों
मेरे बस में नहीं रहा रोकना इसे अब
जाने अब तेरा हुआ जाता है क्यों

नहीं दिखाने मुझे जख्म ये दुनिया को
क्यों तेरे मेरे दरमियाँ इतनी दीवारें हैं
नहीं हटाना तो मत हटाओ साहिब
ये जिंदगी नाम पर तुम्हारे है

कभी फुर्सत मिले तो सोच लेना
किसी के दिल में थोडा दर्द है
तुम रहते तो हो इस दिल में ही
फिर क्यों तेरी जुदाई बेदर्द है

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