क्यों मैंने इश्क़ किया

क्यों इश्क़ किया तुमसे क्यों मैंने दिललगी करली
आँखों में भरे अश्क़ ही जाने क्यों बेखुदी करली

मैं ही जी लेती जैसे तैसे इस जिंदगी को
क्यों अब नाम तेरे मैंने जिंदगी करली
आँखों में भरे........

हस हस कर कट रही थी झूठी ही थी चाहे जिंदगी
क्यों अश्क़ मोल ले लिए क्यों आशिकी करली
आँखों में.भरे.......

खुद को भूल जाते हैं तुम ही याद रहते हो क्यों
लगता है इस दिल ने कभी खुदकुशी करली
आँखों में भरे......

क्यों तुझको देखे बिना चैन नहीं मुझको कहीँ
देखूं एक बार तुझे तो लगे बन्दगी करली
आँखों में भरे......

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