बाँवरी तू युगल कहाँ ते पाय

प्रेम न बन्यो कबहुँ धन मेरो
धन रह्यो जगत को समाय
हिय माँहिं पीर उठे न युगल बिन
बाँवरी तू युगल कहाँ ते पाय

जो होतो प्रेम अति थोरो
हिय रहतो कबहुँ अधीरा नाय
जिव्हा युगल नाम न भजे तेरो
बाँवरी तू युगल कहाँ ते पाये

कबहुँ न होय युगल की सेवा
मन जगत में रह्यो तेरो भरमाय
नैन न बहे कबहुँ युगल बिरह में
बाँवरी तू युगल कहाँ ते पाय

दोष होय तेरो ही हिय माँहि
होय पाषाण युगल कबहुँ न ध्याय
कबहुँ न वास कियो वृन्दनावन को
बाँवरी तू युगल कहाँ ते पाय

कबहुँ न साधु संग नाँहिं सेवा
मन अंतर में विषय रहे समाय
हरि नाम कबहुँ मुख ते उच्चरे
बाँवरी तू युगल कहाँ ते पाय

ढोंग बड़ो किय सकल जग माँहिं
भगतन को भेस झूठो रह्यो बनाय
युगल चरणन माँहि होय न समर्पण
बाँवरी तू युगल कहाँ ते पाय

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