मुझे अपना इश्क़ देना
मुझे अपना इश्क़ देना नहीं कोई और हसरत
मुझे बस यही तलब है चाहूँ तेरी मोहबत
मुझपर अपने इश्क़ का कुछ ऐसा रंग चढ़ा दो
इक तुमको याद रखूं दुनिया ये सब भुला दो
तेरे रंग में ही रंग जाऊँ मिल जाए तेरी उल्फ़त
मुझे अपना इश्क़ देना नहीं कोई और हसरत
मुझे बस यही तलब है चाहूँ तेरी मोहबत
मुझको इस भटक से साहिब आज़ाद करदो
दिल की दुनिया मेरी साहिब आबाद करदो
मुझे सिर्फ तेरी तलब हो और नहीं हो कोई चाहत
मुझे अपना इश्क़ देना नहीं कोई और हसरत
मुझे बस यही तलब है चाहूँ तेरी मोहबत
पल पल ही बढ़ती जाए तेरे नाम की खुमारी
और मुझको नहीं कुछ देना बस देना बेकरारी
तेरा जिक्र प्यारे यही मेरी हो इबादत
मुझे अपना इश्क़ देना नहीं कोई और हसरत
मुझे बस यही तलब है चाहूँ तेरी मोहबत
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