क्या कहूँ दिल के हाल

क्या कहूँ तुम्हें दिल के हाल
नेह लगाये पिया बाँवरी बनाय दीयो
ऐसो नेह करे है मैं कह भी ना पाऊं सखी

बात रखूं दिल में या तुझको बताऊँ सखी
भर रखयो ऐसो मोहे बाँहों में पिया जी
ऐसो नेह छोड़ अब और कहाँ जाऊँ सखी

रीझ गए पिया मेरे पल की पुकार में ही
नित नित अब पिया लाड लड़ाऊं सखी

जाने कब से बिछड़ी थी पिया बोले बाँवरी तू
दूर नहीं पास  मेरे उनकी हो जाऊँ सखी

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