हाय सखी
हाय सखी पिया दूर देस मेरो
लागे नहीं मन हिय में पीर घनेरो
हाय सखी.......
पिया बिन सूना सूना हुआ सब अँगना
और कुछ भावे कैसे पिया जब संग ना
पिया पिया रटत रटत प्राण चले मेरो
हाय सखी......
पिया बिन पीर ये कैसे सहूं मैं
जा जा किसे ये पीर कहूँ मैं
तुम बिन पिया कौन ले सुधि मेरो
हाय सखी.......
जाके हिय पीर वही पीर मेरो जाने
बाँवरी नैन भरे किसी की ना माने
पिया पिया नाम मैं रटूं बस तेरो
हाय सखी.......
पिया बिन धीर मोहे कौन बंधावे
कोई मेरे पिया का संदेसा तो लावे
पिया बिन पीर भारी जले हिय मेरो
हाय सखी.......
कौन देस पिया वास तुम कीन्हों
इस बाँवरी की सुधि हाय लीन्हों
पथ निरखत तेरो साँझ सवेरो
हाय सखी.......
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